ठिनठनी पत्थर
दोस्तो अभी हाल ही में अंबिकापुर जशपुर की यात्रा पर था रायगढ़ से जशपुर की यात्रा में सड़क की हालत खराब देखकर मैनें अपना इरादा बदल दिया ......... पहले मैंने जशपुर तक का ही प्लान बनाया था...... परिवार भी साथ में ही था और किसी ने भी वापसी उसी मार्ग से करने पर अपनी सहमति नहीं दी ........ बहुमत के फैसले के बाद मन बदल गया और यात्रा में बदलाव करना प़ड़ा........... अब वापसी अंबिकापुर होकर करने का मन बनाया ...... क्योंंकि अंबिकापुर जशपुर की दूरी ज्यादा नहीं थी........ अंबिकापुर जाना था तो मैनपाट भी देख लिया जाए ...... बस क्या था अपना ऐरावत ( कार) मैनपाट की ओर कूच कर गया ...... मगर समय और दूरी को द्खते हुए मैनपाट में केवल कौतूहल वाली जगहों को देखने का मन बनाया...... इसमें ठिठठिनी पत्थर भी एक था ...........
ठिनठिनी पत्थर की पूरी रिपोर्ट मेरे अपने टू ट्यूब के इस वीडियो में दिया है ....... आप तो हो आए होंगे ....... मगर मेरी नजर से एख बार फिर देख लीजिएगा ............ सरगुजा संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर से 12 किलोमीटर दूर दरिमा हवाई अड्डे से लगा छिंदकालो एक गांव है. मगर यह ठिनठिनी पत्थर के नाम से जाना जाता है . इस गांव में पत्थरों का एक बड़ा समूह है और इन पत्थरों में एक बड़ा पत्थर लोगों के लिए आज भी रहस्य बना हुआ है. इस पत्थर को लेकर कई भूगर्भ शास्त्रियों और भू विज्ञान के जानकारों ने शोध भी किया है. अंबिकापुर जिले के दरिमा हवाई अड्डे के बाउंड्री से लगे इस गांव में सैकडों पत्थर का समूह है. यहां तक कि आस-पास में भी जमीन के नीचे भी काफी पत्थरों का भंडार है. लेकिन जमीन के ऊपर जिन सैकडों पत्थरों का समूह है, उन पत्थरों के समूह के बीच करीब 6 फिट का एक रहस्यमयी पत्थर है. काले पत्थरों के बीच धुंधले सफेद रंग के इस पत्थर को ठिनठिनी पत्थर के रुप में जाना जाता है ।ये पत्थर धातु की तरह आवाज करता है. इस पत्थर के चारों तरफ अलग-अलग धातु की आवाज आती है. कहीं पत्थर के किसी हिस्से पर दूसरे छोटे पत्थर पर वार करने से उसमें स्कूल की घंटी की तरह आवाज आती है, कहीं पर पीतल के बर्तन के तरह, तो कहीं पर कांसे के बर्तन की तरह आवाज आती है. पत्थर के किसी हिस्से में मोटे बर्तन की आवाज आती है, तो कुछ ऐसा भी हिस्सा है जहां से पतली आवाज निकलती है.।
